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ओरण संरक्षण को लेकर राजस्व विभाग पायलट प्रोजेक्ट के तहत करेगा काम - राजस्व मंत्री


जयपुर, 5 जून। कोरोना काल में उत्पन्न हुई ऑक्सीजन की कमी ने आम जनता को पर्यावरण संरक्षण का महत्व बताया है। राजस्व मंत्री श्री हरीश चौधरी ने यह बात शनिवार को वेबिनार के जरिये ओरण संरक्षण एवं विरासत को बचाने के लिए आयोजित को वेबिनार में कही।

वेबिनार को सम्बोधित करते हुए राजस्व मंत्री श्री हरीश चौधरी ने कहा कि राजस्थान में ओरण भूमि को लेकर पहल करने की आवश्यकता है। राजस्व विभाग पूरे राज्य में ओरण व शामलात भूमि के सरंक्षण को लेकर प्रयास किया जाएगा। ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में लेने सहित कार्य किया जाएगा जिसमे जिले व तहसील इकाई के आधार पर राजस्व विभाग कार्य करेगा। राजस्व मंत्री ने कहा कि समाज सदियों से ओरण भूमि को संरक्षित करता आ रहा है ऎसी भूमियो को लेकर राजस्व विभाग जमीन का सीमांकन कर पिलर या प्वाइंट्स के जरिये चिन्हित किया जाएगा। राजस्व मंत्री ने कहा कि ओरण भूमि में बबूल, झाड़ी कटिंग मनरेगा के तहत पँचायत स्तर पर करवाया जाएगा।

राजस्व मंत्री ने वेबिनार में कहा कि ओरण संरक्षण के साथ साथ स्थानीय वनस्पति, खेजड़ी का भी संरक्षण करना है इसके तहत इन वृक्षो को ओरण में अधिक से अधिक लगाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही साथ जो समाज की धारणा रही है उसी के अनुरूप ओरण क्षेत्र का संरक्षण व संवर्धन किया जाएगा। 

वेबिनार में नेहरू युवा केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डा भुवनेश जैन ने समुदाय आधारित ज्ञान विज्ञान से ओरण संरक्षण की संकल्पना को फलीभूत कर रेगिस्तान की पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के तरीकों को साझा किया। इस वेबिनार में विष्णु शर्मा अजमेर, डा लता कच्छवाह बाड़मेर, शांतनु राय भीलवाड़ा, पार्थ जगानी, जैसलमेर, डा सुरेश जोधपुर, बाबूलाल विश्नोई खेजडली, दिलीप बिदावत बाड़मेर, रवि जैन तिंवरी, महेंद्र सिंह तंवर जोधपुर, सुमेरसिंह भाटी जैसलमेर, डिंपल भीलवाड़ा, बी के सिंह जयपुर, डा सुमित डऊकिया, नई दिल्ली ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

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